दिल्ली से चण्डीगढ़

दिल्ली से चण्डीगढ़

मैं जीत शर्मा फिर से आपके सामने एक कहानी ले कर आया हूँ। यह कहानी मुझे मेरी एक महिला मित्र ने भेजी है, उम्मीद है कि आप सबको पसंद आएगी।

तो दोस्तो कहानी पेश है मेरी दोस्त की जुबानी।

मैं शिप्रा हूँ, दिल्ली में एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी में काम करती हूँ। अपने काम के सिलसिले में मुझे टूअर पर जाना पड़ता रहता है। पिछले हफ्ते मैं चंडीगढ़ गई थी। मेरी ट्रेन 10 बजे की थी और मेरा रिज़र्वेशन एसी प्रथम श्रेणी में था। मैं कूपे में अपनी सीट पर जाकर बैठ गई पर कोई भी मेरी सामने वाली सीट पर नहीं आया। मुझे लगा कि वो सीट खाली है तो मैंने अपना सामान उस सीट पर रखा और अपने कपड़े बदल कर लेट गई।

तभी अचानक किसी ने दरवाजा खटखटाया। मैंने सोचा टीटी होगा पर वो तो कोई सलौना बांका जवान था। उसके अंदर आने के बाद मैंने उसकी सीट पर पड़ा अपना सामान हटा लिया।

“ओह ! सॉरी, मैं समझी कि सीट खाली है।”

“इट’स ऑल राइट ! कोई बात नहीं।” वो बोला।

अब टीटी के आने की देर थी पर मुझे जोर से नींद आ रही थी क्योंकि सारा दिन ऑफ़िस में काम किया था और घर आकर खाना वगैरह बनाने में आराम करने का वक़्त ही नहीं मिल पाया। मैं बहुत थक गई थी, मैंने उससे कहा- अगर आपको परेशानी ना हो तो मैं आपकी बर्थ पर सो जाऊँ क्योंकि यह सीट मुझे असुविधाजनक लग रही है?

“ओह… कोई बात नहीं !”

मैं चादर बिछा कर सो गई। मैंने नाइट सूट पहना हुआ था, अंदर ब्रा और पेंटी नहीं पहनी थी। मुझे रात को यह सब पहनना अच्छा नहीं लगता। मेरे पतले से नाइट सूट में मेरा गोरा और गुदाज़ बदन देख कर उसकी आँखें तो जैसे फटी की फटी ही रह गई थी। वो मेरे इस सेक्सी लुक को देख कर आकर्षित हो गया था।

मुझे अभी नींद तो नहीं आई थी पर मैंने आँखें बंद कर रखी थी। अचानक मुझे लगा जैसे कि कोई मुझे छू रहा है पर इसे अपना वहम समझ कर मैं चुपचाप लेटी रही।

थोड़ी देर बाद मैंने अपनी एक आँख धीरे से आधी खोली। मैंने देखा वो लड़का पाजामा और बनियान पहने था और मेरी जाँघों को सहला रहा था। उसकी गर्म साँसें मेरे चहरे पर महसूस हो रही थी।

यह देखकर मैं हड़बड़ा कर उठ बैठी। उठते समय मेरे गाल उसके होंठों से छू गये।

वो सॉरी कहते हुए अपनी सीट की ओर जाने लगा। इससे पहले की मैं कुछ बोलती टीटी आ गया और उसने हम दोनों की टिकट चेक की।

उसने बताया कि आज यात्री ज्यादा नहीं हैं इस कूपे में बाकी सभी सीटें खाली हैं चंडीगढ़ तक कोई नहीं आएगा। आप आराम से दरवाजा बंद करके सो सकते हैं। टीटी बड़े रहस्यमय ढंग से मुस्कुरा रहा था। उस लड़के ने टीटी का धन्यवाद किया और दरवाजे की सिटकनी लगा ली। फिर वो मेरे पास ही आकर बैठ गया।

उसने पूछा- आप कहाँ तक जाएँगी?

“चंडीगढ़… और आप?”

“मैं कालका तक जाऊँगा।”

“फिर तो चंडीगढ़ तक साथ रहेगा।”

“एक बात बोलूं?”

“क्या?”

“आप बहुत खूबसूरत हैं !”

“ओह थॅंक्स !” मैंने शर्माकर अपनी आँखें झुका ली।

“क्या आपका कोई बॉय फ्रेंड नहीं है?”

“नहीं… और तुम्हारी कोई गर्ल फ्रेंड है या नहीं?” मैंने भी पूछ लिया।

“नहीं मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है पर किसी को बनाना चाहता हूँ।”

“किसको? मेरा मतलब है कैसी लड़की चाहते हैं?”

“आप जैसी खूबसूरत और मासूम?” उसने मेरी आँखों में झांकते हुए कहा। उसकी गर्म साँसें मेरे चहरे पर महसूस हो रही थी। मैं भी बहुत गर्म हो गई थी। मैं भी इस रात को आज रंगीन बना लेना चाहती थी।

“क्या मुझे अपनी गर्लफ्रेंड बनाओगे?”

मेरा खुला निमंत्रण पाकर वो तो जैसे निहाल ही हो गया। उसने मुझे बाहों में भर लिया। वो सीट से खड़ा होकर मेरे से चिपक गया और मेरे होठों को चूमता हुआ मेरे जिस्म पर हाथ फेरने लगा।

मैं सीट पर बैठी थी। मैं भी उत्तेजित हो गई थी। पजामे में उसका लंड खड़ा साफ नज़र आ रहा था। मैंने उसे ऊपर से ही पकड़ लिया और सहलाने लगी।

फिर मैंने उसके पाजामे का नाड़ा खोल दिया और उसे नीचे सरका दिया। उसका लंड तो जैसे उफान ही मार रहा था। कम से कम 7” लंबा और 2” मोटा तो जरूर होगा। मैंने उसे मुँह में भर लिया और चूसने लगी।

वो मेरा सिर पकड़ कर अपनी कमर आगे पीछे हिलाने लगा। वो तो मेरे मुँह में अपने लंड को ऐसे अंदर-बाहर कर रहा था जैसे वो मुँह ना होकर कोई चूत ही हो। कोई 5-6 मिनट तो मैंने उसका लंड जरूर चूसा होगा। मैं तो और भी चूसना चाहती थी पर मुझे डर था कि वो कहीं मेरे मुँह में ही ना झड़ जाए।

अब हम दोनों ने ही अपने कपड़े उतार दिए। अब हम मादरजात नंगे थे। अब हम 69 की अवस्था में लेटकर वो मेरी चूत चाटने लगा और 10 मिनट में मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया।

मैंने उसके लंड को ज्यादा नहीं चूसा बस उसके आंड (टट्टे) चूमती और चाटती रही।

अब वो उठा खड़ा हुआ और मेरे पैर चौड़े करके अपना लंड मेरी चूत के छेद पर टिका दिया। मैंने अपनी आँखें बंद कर ली। उसने एक धक्का लगाया तो उसका पूरा का पूरा लंड मेरी चूत में घुस गया। मुझे बड़ा दर्द हुआ क्योंकि मैंने आज से पहले इतना मोटा और लंबा लंड अपनी चूत में कभी नहीं लिया था।

वो दनादन धक्के लगाने लगा। उसने मेरे दोनो पैर उपर उठा रखे थे और धक्के पर धक्के लगा रहा था। मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया और अब उस से फच फच की आवाज़ें आने लगी थी।

अब उसने मुझे घोड़ी बनाया और पीछे आकर मेरी चूत में फिर से अपना लंड डाल दिया। अब तो और भी मज़ा था। उसने मेरी कमर पकड़ी और जोर जोर से धक्के लगाने लगा। मेरी चूत कुछ भींच सी गई थी इसलिए उसका कसाव बढ़ गया था। इस से मेरी दोनो फाँकें भी लंड के साथ अंदर-बाहर होने लगी थी। मुझे बड़ा मज़ा आने लगा। कोई 15 मिनट उसने मुझे इस स्टाइल में चोदा। मेरी चूत ने एक बार फिर पानी छोड़ दिया। उसने भी 3-4 धक्के जोर से लगाए और वो भी झड़ गया। उसका सारा वीर्य मेरी चूत में भर गया।

इतने में पानीपत स्टेशन आ गया था। गाड़ी वहाँ रुकी थी। वो कपड़े पहन कर चाय लेने चला गया। मैंने कपड़े नहीं पहने थे। वो चाय ले आया। अंदर आकर उसने फिर अपने कपड़े निकाल दिए और फिर मैं उसकी गोद में बैठ गई। हमने चाय पी तब तक उसका लंड फिर खड़ा हो चुका था। उसने धीरे से अपना लंड मेरी चूत में सरका दिया। चूत तो पहले से ही उसके वीर्य से भरी थी। लंड पूरा का पूरा बेझिझक उसमें समा गया। मैं अपने पैर चौड़े करके उसकी गोद में बैठी रही और उछल उछल कर उसे चोदने लगी।

इस बार हम दोनो को ही झड़ने में पूरे 30 मिनट लगे। सारी रात हम्मे इस कार्यक्रम को जारी रखा और 4 बार उसने मुझे कस कस कर चोदा। मैंने भी उसे निराश नहीं किया और हर बार चुदने से पहले उसका मोटा लंड मैंने जी भर कर चूसा था और उसने मेरी चूत को।

चंडीगढ़ आते ही मैंने उसके लंड को एक बार चूमा और उसने मेरी चूत को। फिर मैं कपड़े पहन कर गाड़ी से नीचे उतर आई।

आपको यह सच्ची कहानी कैसी लगी प्लीज़ मुझे जरूर बताना और यह भी बताना मत भूलना कि आपका लंड खड़ा हुआ या नहीं और मेरी सहेलियों की चूत गीली हुई या नहीं?

आपको मेरी दोस्त की यह कहानी कैसी लगी मुझे जरूर बताना।

आपका दोस्त जीत

मुझे मेल करना मत भूलना।

आपका जीत शर्मा

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