दोस्त की बहन ने चुदवाया, उसके बूब्स को सीधे मुह ले लिया

में काफी टाइम से कहना चाहती हूं, लेकिन मौका नहीं मिला.

मैंने कहा : ऐसा क्या कहना है तुम्हें?

अफरीन ने कहा : तुम डरा रहे हो मुझे.

मैंने कहा : अच्छा कहो जो कहना है, मैं कुछ नहीं कहूँगा तुम्हें.

उसने कहा : वह मैं अम्म.

मैंने कहा : ह्म्म्म.

उस ने कहा : मैं तुम्हें पसंद करती हू.

मेरे पास बोलने को कुछ नहीं था, मैंने इतना सोचा नहीं था कि ऐसा भी हो सकता है. ऊपर से दोस्त की बहन थी, मैंने उसे बुरी नजर से उसे देखा नहीं सकता था. ऐसा नहीं कि मैं दूध का धुला हुआ था कई बार मैंने उसे वैसे जरूर उसे देखा लेकिन दोस्ती आडे आ जाती है हमेशा. तो ज्यादा सोचा नहीं. ना चाहते हुए भी मुझे उसे ना बोलना पड़ा. अच्छी लड़की हाथ में आ कर निकल रही थी. मैंने कहा : देखो तुम मेरे दोस्त की बहन हो तो मैं तुम्हें अपनी..

उसने कहा : प्लीज आगे कुछ मत बोलना. आपको नहीं करना तो ठीक है लेकिन मुझे अपनी बहन तो मत बोलना, कम से कम इतना तो कर ही सकते हो मेरे लिए.

इतना सब उसने रुड होकर कहा था उसकी आवाज में नाराजगी साफ समझ आ रही थी.

मैंने कहा अफरीन देखो ऐसा नहीं कि तुम मुझे पसंद नहीं हो. तुम्हारे जैसी लड़की को कौन होगा जो अपनी गर्लफ्रेंड नहीं बनाना चाहेगा? मेरी तो किस्मत ही खराब है कि तुम मेरे दोस्त की बहन हो अगर ना होती तो शायद मेरी गर्लफ्रेंड होती.

उस ने : कहा घर पर किसी को पता नहीं चलेगा.

मैंने कहा : मैं अपने दोस्त को धोखा नहीं दे सकता यार समजो.

आफरीन ने कहा ठीक है जैसी तुम्हारी मर्जी.

मैंने उसे घर छोड़ दिया और रात भर मैं सो नहीं सका. फिर मेरे और मेरे दोस्त की फैमिली के ऊपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, मेरा दोस्त जो मेरे लिए बहुत कुछ था दुनिया छोड़ कर चला गया था इतनी सी उम्र में.

डेंग्यू में हुई मौत मैं उसका नाम भी जुड़ गया था. कुछ दिन ऐसे ही बीत गये मैं सदमे से निकला उसके घर जाना भी छुट गया था.

इस साल मार्च में अफरीन मीली.

अफरीन ने कहा : भाई क्या गए आप ने तो घर आना ही छोड़ दिया, चलो घर चलो, अम्मी अब्बू कितना याद करते हैं. तुम्हें अपने बेटे से ज्यादा याद करते हैं.

मैंने कहा : ठीक है आऊंगा टाइम निकालकर.

आफरीन ने कहा टाइम निकालकर नहीं अभी के अभी चलो मेरे साथ.

वह मानी नहीं मुझे जिद करके घर ले गयी.

आफरीन के पापा ने कहा बेटा तुम तो भूल ही गए हमें.

मैंने कहा नहीं अंकल ऐसी बात नहीं है, बस कॉलेज में बिजी हूं काफी.

आफरीन के पापा ने कहा बेटा १०-१५ दिन में घर पर आ जाया करो.

अफरीन ने कहा अब्बु इनसे बोलो घर पर हर विक आया करेंगे.

अंकल ने कहा : हां बेटा.

मैंने कहा मैं कोशिश करूंगा कि हर विक आ सकूं.

यहां महीने हर वीक जाना शुरु किया और कई बार विक में दो बार भी चला जाता था.

अंकल कम मिलते एक बार सिर्फ अफरीन और आंटी ही घर पर थी. अफरीन मेरे साथ बात करते हुए एकदम उदास हो गई.

मैंने कहा : क्या हुआ?

आफरीन ने कहा कुछ नहीं.

मैंने कहा : उदास क्यों हो? मुझसे तो शेयर कर सकती हो.

उसने कहा चाहती तो थी कि सब टाइम शेयर करू बट तुमने हीं मना कर दिया.

मैंने कहा अब तो कोई मिल गया होगा.

अफरीन ने कहा नहीं.

मैंने कहा उदास ना रहो. आफरीन ने कहा इस की वजह आप हो.

यहां उसने मुझे इतना इमोशनल कर दिया कि मुझे ना चाहते हुए भी हां बोलना पड़ा.

मैंने कहा ठीक है जैसे तुम चाहती हो मैं तैयार हूं.

किस चीज के लिए तैयार हो?

यह आवाज आंटी की थी, में बिल्कुल घबरा गया था.

मैंने कहा कुछ नहीं आंटी बस स्कूटी सिखाने को बोल रही थी.

आंटी ने कहा मैं सब जानती हूं बेटा.

मेरे पास कहने को कुछ नहीं था.

आंटी ने कहा काफी टाइम आफरीन उदास थी, कभी खाना ठीक से नहीं खाती, कभी किसी से बात नहीं करती. कल जब मैंने जोर देकर पूछा तभी उसने सारी बात बताई. मैं थोड़ी ओपन माइंडेड हूं इसलिए कुछ नहीं कहूंगी, इस उमर में ही ऐसा होता है. अगर अंकल को यह पता चला तो सबकुछ खत्म समझो.

मैंने कहा : आंटी मैं नहीं चाहता कि ऐसा हो, काफी समझाया उसको, लेकिन यह समझने को तैयार ही नहीं है.

आंटी ने कहा जो करना है करो. मैं इन सब से अनजान रहना चाहती हूं. बस मुझे पता नहीं चलना चाहिए जो भी तुम करोगे.

इतना कह कर आंटी चली गई और अफरीन मुझे गले लग कर रोने लगी. मैं अब बेहद लाचार था. कुछ भी समझ के परे था. अफरीन चुप कराया.

मैंने कहा बताओ तुम क्या चाहती हो?

उस ने कहा आपको पता है.

मैंने कहा ठीक है तुम्हारी मर्जी.

अब हमारा रिलेशन शुरू हुआ. इस बीच में उनके घर भी जाता, खूब हंसी मजाक चलता.

जब हम मिलते तो सब कुछ चलता, जैसे गालो को किस करना, थोड़ा बहुत इधर उधर टच करना.

एक दिन मैं उसके घर गया तो वह अकेली थी घर पर मैंने पूछा बाकी कहां है?

तो वह बोली अम्मी की तबीयत खराब है दूसरे रूम में लेटी है और बाकी अपने काम पर.

मैंने कहा देखु तो सही आंटी कैसी है?

उसने ने कहा नहीं रात भर से सोई नहीं, अभी एक घंटा हुआ सोए हुए.