लोहड़ी की रात मेरी पहली सुहागरात

मैं धीरे धीरे धक्के देता रहा और कुछ ही मिनट में नैना का दर्द भी गायब हो गया और वो नीचे से अपनी गांड उठाने लगी। मैंने भी सिग्नल मिलते ही धक्कों की रफ़्तार तेज़ कर दी और उसकी चूत चोदने लगा।
उसके मुंह से आह… आह… यस… फ़क मी… यस… और… और… जानू… और… और करो… रुको मत… बस … आअज अंदर ही रखो अपने इसको… ओह्ह… आह्हः… ईश… अहह… हाँ… और करो… और… और… और… और… जैसी आवाज़ें आने लगी।

मैंने उसकी चूत से लंड बाहर निकाल दिया क्यूंकि मैं उसको तड़पाना चाहता था।
वो कहने लगी- क्या हुआ?
मैंने कहा- कुछ नहीं, तुमको दर्द हो रहा है तो मैंने निकाल दिया बाहर।

उसने मेरे लौड़ा पकड़ा और अपनी चूत में डालने लगी लेकिन मैंने नहीं डालने दिया।
वो कहने लगी- प्लीज डालो ना… मज़ा आ रहा है प्लीज!
मैंने उसको कहा- एक शर्त पर कि तुम भी देखोगी कैसे मेरा लंड तुम्हारी चूत की धुनाई कर रहा है।
उसने कहा- ठीक है, पर कैसे?

मैं बेड पर लेट गया और उसको कहा- मेरे ऊपर बैठो!
वो मेरी तरफ मुंह कर के बैठ गई फिर मैंने उसको कहा- अब मेरे लंड को पकड़ कर अपनी चूत में लो और फिर धीरे धीरे नीचे बैठ जाओ।

उसने वैसे ही किया और लंड उसकी चूत में समा गया, वो बोली- अब क्या करूं?
मैंने कहा- अब ऐसे ही बैठे बैठे लंड को अंदर रख कर ही घूम जाओ और मेरे मुंह की तरफ अपनी पीठ कर दो!
उसने वैसा ही किया।

जैसे ही वो घूमी, लंड भी उसकी चूत में घूम गया और वो सेक्स के इस एहसास से पागल सी हो गई और कहने लगी- फिर से घूमूँ? बड़ा मज़ा आया अंदर लंड घूमने में।
मैंने कहा- नहीं, अब हाथ पीछे को रख कर ऊपर नीचे उछलो और सामने लगे बड़े शीशे में खुद की चुदाई देखो।

वो उछलने लगी और शीशे में अपनी चुदाई देख कर बहुत खुश हुई।
फिर उसने कहा- मेरे चूचे कैसे उछल रहे हैं, इनका कुछ करो ना बहुत तंग करते हैं ये सेक्स चैट के समय।
मैंने उसके चूचे पकड़े और उनको मसल दिया, उसके मुंह से आह निकल गई।

फिर जब वो थक गई तो मैंने उसको घोड़ी बनाया और पीछे से उसकी चूत चोदी। इस आसन में भी उसको बहुत मज़ा आया फिर मैंने उसको अपनी गोद में बिठा कर भी चोदा। गोद वाला आसन उसका मनपसंद आसन बन गया जो आज भी उसका पसंदीदा है।
बहुत देर तीन चार आसनों में उसकी चुदाई करने के बाद जब मेरा माल निकलने वाला था तो मैंने वो उसके चूचों के ऊपर डाल दिया।

इस पर उसने कहा- अब क्या मेरे चूचे भी गोरे हो जायेंगे?
मैंने कहा- हाँ!
और हंस दिया।

उसके बाद हमने बहुत देर तक एक दूसरे को चूमा और फिर से मिल कर चुदाई करने का वादा किया।

जैसे ही हमने कपड़े पहने, तभी उसके घर के दरवाज़े पर दस्तक हुई, हम डर गए।
मैं फटाफट पिछले दरवाज़े से भाग के पिछले गेट से कूद कर अपने घर में घुस गया।

फिर मैंने रात को उसको पूछा कि कौन था.
तो उसने बताया- ऋदम दीदी थी, वो मुझको बुलाने आई थी कि ‘आ जा डांस शुरू हो गया है।’

लेकिन वो तो मुझे बाद में पता लगा कि उस दिन ऋदम ने हमें टैम्पो ट्रैक्स में भी स्मूच करते देख लिया था और उसने हमारी चुदाई की भी आवाज़ें सुन ली थी।
मैंने ऋदम वाली समस्या को कैसे शांत किया, यह मैं आपको अपनी अगली कहानी में बताऊंगा।

प्लीज मुझे मेल करके मेरी इस कहानी के बारे में ज़रूर बताएं कि आपको यह सेक्सी कहानी कैसी लगी।
और हाँ, प्लीज कोई भी मुझसे ऋदम या नैना का पता या नंबर मांगने की कोशिश ना करे क्यूंकि मैं किसी भी लड़की, भाभी, या आंटी की कोई भी डिटेल किसी को नहीं दे सकता।
मुझे आपके मेल्स का इंतज़ार रहेगा.