मेरा सच्चा प्यार भाभी के साथ

फिर मैं उससे मिल कर वापस अपने गांव आ गया. वो अपने मायके में जो पहले 15-20 दिन रहा करती थी, अब उसको पांच दिन भी वहां रहने में दिल नहीं लगता था. वो मेरे लिए सोचती थी कि उसकी जान अकेली होगी, मैं क्या कर रहा होऊंगा, क्या नहीं कर रहा होऊंगा. मेरे साथ जीने की उसको लत सी लग गई थी. वो मुझे देखे बिना एक पल भी नहीं रह पाती थी.

जब मैं दुकान में होता, तब अपनी छत से मुझे हर बार देखने आती थी. उठने से लेकर सोने तक का मेरा ध्यान रखती थी.

जब वो गांव से वापस आई, तब तक सर्दी बहुत बढ़ चुकी थी. मेरे पास पहनने को स्वेटर नहीं था. या यूं कह लो कि उस वक्त मेरे पास कड़की चल रही थी और मेरे पास स्वेटर खरीदने को पैसा नहीं था. वो मेरे लिए कोट खरीद कर लाई. वो मेरी लाइफ का मेरे लिए पहला तोहफा था. उसे लेने के लिए जहां उसने मुझे बुलाया, मैं वहां गया. मैं उसे लेकर आ गया. कोट का मूल्य मुझे नहीं मालूम था. उसके लिए तोहफा मायने रखता था, कीमत नहीं. मैंने उससे नहीं पूछा कि कितने का है. मैंने उसका तोहफा समझ कर कोट रख लिया. मैं उसे रोज पहनने लगा.

अब हम दोनों में मिलन की आग लगने लगी थी. जो हम दोनों को ही बेचैन कर रही थी. ये उस दिन से ज्यादा भड़कने लगी थी. जब मैंने उसी के गांव में नहर के किनारे उसके दूध पिए थे. उस समय जगह और समय का तोड़ा (कमी) था, नहीं तो उसी दिन खेल हो जाता.

खैर अब हम दोनों ने सेक्स करने का प्लान बनाया. घर पर हम मिल नहीं सकते थे, तो किसी काम के बहाने बाहर जाकर ही ये हो सकता था. मैं किसी काम का बहाना करके निकल गया. मैं उसे भी साथ लेकर निकल गया. शाम का टाइम था, अंधेरा हो गया था, सर्दी भी लग रही थी. मैंने एक सुनसान जगह पर जाकर गाड़ी को रोका. गाड़ी को रोकने के बाद हमने 10 मिनट तक किस किए. मैंने उसके मम्मों को खूब मसला और बहुत देर तक चूसा. हम दोनों को ही बहुत मजा आ रहा था. फिर मैंने उसकी चुत को किस किया, तो वो तड़प सी गई. उधर अंधेरा बहुत था और डर भी लग रहा था कि कोई हमें देख ना ले.

मैंने अपनी गाड़ी की डिक्की से दरी निकाल कर उस पर उसे लेटा दिया. हम दोनों खुले आसमान के नीचे दरी पर एक दूसरे से गुत्थम गुत्था हो गए. जब मैंने अपना लंड उसकी फुद्दी में घुसाया, तो हमारे अन्दर आग सी लग गई. उसने मेरे लंड को खा लिया था और टांगें उठा कर मुझसे पूरा अन्दर आने को कह रही थी. हम दोनों बिंदास सेक्स कर रहे थे. हमें किसी की परवाह नहीं थी. कुछ देर बाद मैंने उसके अन्दर ही अपने रस को छोड़ दिया. कुछ पल के लिए हम दोनों एक दूसरे से चिपक कर लम्बी सांसें लेने लगे.

फिर हमने लम्बी सी किस की और एक दूसरे को देख कर बहुत खुश हुए. इसके बाद मैं उसको उसके घर छोड़ कर अपने घर आ गया. ये वो पल थे, जब मैंने अपनी लाइफ में पहली बार सेक्स किया था. ये मेरी लाइफ का पहला सेक्स था.

फिर आया हमारे प्यार का हसीन पल. जिसे सब वैलेंटाइन डे का नाम देते हैं. हमने बस वैलेंटाइन डे का वो दिन मनाया, जो एक पति पत्नि या एक गर्लफ्रेन्ड या बॉय फ्रेन्ड वैलेंटाइन डे मनाते हैं, यानि 14 फरवरी के दिन को ही हम दोनों ने एक दूसरे को दिल से विश किया. वो पल मेरे लिए बड़े हसीन पल थे.

उसके बाद आई होली, होली का दिन मेरी लाइफ का सबसे अच्छा दिन रहा या ये कहूँ कि उसकी लाइफ का सबसे बुरा दिन रहा. दिन तो पूरा अच्छा था, लेकिन मैं रात में उससे एसएमएस से बात कर रहा था. अचानक उसको नींद आ गई. मुझे नहीं मालूम था कि उसका पति घर आया हुआ है.

उस दिन उसका मोबाइल उसके पति के हाथ लग गया. वो मुझसे बात करता रहा. मुझे पता नहीं चला कि उसका पति मुझसे बात कर रहा है. हम वैसे भी एसएमएस पर हर तरह की बात कर लिया करते थे. जैसे सेक्स, लव सब कुछ.

उस रात उसके पति ने उसको बहुत मारा. उसने पूरा इलजाम अपने ऊपर ले लिए. मेरे लिए उसने बहुत मार खाई.
जब मुझे पता चला तो मुझे ऐसा लगा जैसे मेरे दिल पर किसी ने वार किया हो. उस दिन ना मुझसे खाना खाया गया, ना पानी पिया गया. मेरा दिन जैसे रूक सा गया था. उसने खुद सजा पा ली थी लेकिन अपनी जान को गलत साबित नहीं होने दिया था. क्योंकि उसको पता था कि मैं उसे कभी अकेला नहीं छोड़ूँगा. उसको ये भी पता था कि उसके बिना मैं भी नहीं जी सकता था. फिर वो मेरा साथ कैसे छोड़ देती.

ये झंझावत मानो जैसे हमारी लाइफ में कोई बुरा वक्त आया था, फिर वो भी चला गया. उसका पति फिर कोटा चला गया था.

अब हमें किसी का डर नहीं था क्योंकि हमारे ऊपर प्यार का भूत सवार था. हमें प्यार के अलावा कुछ नहीं दिखता था. फिर हम वापस मिलते रहे, हमारा प्यार पहले जैसा चलता गया. हम बहुत खुश थे, फिर हम महीने में एक बार मिलने चले जाते थे. हमने लाइफ में बहुत कुछ किया जो एक पति पत्नि या एक गर्लफ्रेन्ड और बॉयफ्रेन्ड ही करते हैं.

फिर हमने हमारे प्यार को एक यादगार पल बनाने के लिए एक दिन डिसाइड किया. वैसे हम दोनों सेक्स तो बहुत बार कर चुके थे. जब भी वो अपने मायके वाले गांव जाती थी, तब मैं उससे मिलने चला जाता था. जब मैं उससे मिलने जाता, वो इतना खुश होती कि मानो वो वर्षों से मेरा वेट कर रही हो. जैसे मैं उसके लिए बना था और वो मेरे लिए.