मेरा सच्चा प्यार भाभी के साथ

खैर.. उस दिन हमारे प्यार में वो सुर्खी थी कि मैंने अपनी जान को उस दिन 4 बार चोदा. पर हर बार मैंने अपना रस बाहर ही छोड़ा.

इसके बाद हमार प्यार बढ़ता चला गया. मेरी जब इच्छा होती, उससे मिलने चले जाता. यूं ही समय बीतता चला गया. हमारी लाईफ ठीक ठाक चल रही थी. वो जहां बोलती, मैं उसे घुमाने ले जाता. हमारी लाईफ में हमें रोकने वाला कोई नहीं था. हम दोनों बहुत खुश थे.

हम रोज घंटों बातें करते. जिस दिन मेरी बात नहीं होती, उस दिन मेरा दिल दिमाग काम नहीं करता था.

हम कभी लड़ते झगड़ते नहीं थे, हमें बस प्यार के अलावा दूसरा कोई शब्द याद ही नहीं था. वो मेरी जिन्दगी थी, मैं उसका मानो अंश था.

मेरे प्यार की बाक़ी की कहानी मैं अगले भाग में लिखूंगा. आप चाहें तो मेल कर सकते हैं.