पोलियो वेक्सिन के लिए आई आंगनबाड़ी वाली रेखा की चुदाई की

नमस्कार दोस्तो, हिन्दी सेक्स कहानी की दुनिया में आपका स्वागत है.
जैसा कि आप जानते हैं कि मैं राज शर्मा चुदाई का बहुत बड़ा दीवाना हूं. मैंने कमसिन लड़की से लेकर बुड्ढी औरतों तक को जमकर चोदा है.
अनेकों चुत चोदने के बाद अब मेरे लंड का साइज काफी बड़ा हो गया है.

दोस्तो, लॉकडाउन में मैं अपने गांव गया था. मेरी मां और पापा, नाना के गांव गए हुए थे.

मेरे चाचा का कुछ पता नहीं रहता है कि वो किधर मटरगश्ती करते घूम रहे हैं और मेरी चाची चारा काटने खेत गई थीं.
मैं घर में बिल्कुल अकेला था और हल्की हल्की बारिश हो रही थी.

तभी दरवाजे से आवाज आई- कोई है?
मैंने जाकर देखा.
तो वो एक आंगनबाड़ी की सदस्या हाथ में दवाई का बॉक्स लिए खड़ी थी.

मैंने दरवाजा खोला.
तो वो बिना कोई बात किए हुए अन्दर आ गई उसने मेरे बारे में पूछा, फिर बोली- आपकी चाची कहां हैं?
मैंने कहा- वो तो खेत गई हैं, कुछ काम हो तो बताएं.

वो बोली- उनके छोटे बेटे को पोलियो की खुराक देनी है.
मैंने कहा- वो भी उनके साथ गया है.

अब वो सोचने लगी, तभी एकदम से तेज बारिश होने लगी. वो बारिश के कारण मेरे घर में ही रुक गई.

मैंने उससे चाय के लिए पूछा, तो वो मना करने लगी कि रहने दो, कौन बनाएगा.
मैंने कहा- अरे मैं अभी बना देता हूं. वैसे भी बारिश तेज है और ये देर तक नहीं रुकने वाली लग रही है. आप बैठो, मैं अभी चाय बना कर लाता हूँ.

मैं उसके उत्तर की प्रतीक्षा किए बिना किचन में चला गया और चाय बनाने लगा.

जब तक चाय बनती, तब तक मैंने एक प्लेट में नमकीन भी निकाल ली.

पांच मिनट बाद मैंने उसके सामने चाय और नमकीन लाकर रख दी.
हम दोनों चाय का आनन्द लेने लगे और बातचीत शुरू हो गई.

बातों ही बातों में उसने अपना नाम रेखा बताया और इठला कर हंसते हुए बोली- मैं फिल्म वाली रेखा नहीं हूँ. अस्पताल वाली रेखा हूँ.

मैंने उसका नाम बताने का अंदाज सुना मेरे लौड़े में हरकत शुरू हो गई. मैंने उसे बताया कि मुझे भी अमिताभ बच्चन ही समझिए.

वो हंसने लगी और उसने आगे बताया कि मैं पास के गांव में ही रहती हूँ.

अब तक बारिश और तेज होने लगी और धीरे धीरे अंधेरा भी छाने लगा. इतने में तेज बिजली कड़की, तो उसने घबरा कर अपनी आंखें बंद कर लीं. उसे बिजली से डर लग रहा था, तो मैं उसके पास बैठ गया.

तभी फिर से बिजली कड़की, इस बार उसने कसकर मेरा हाथ पकड़ लिया.
उसके हाथ के स्पर्श से मेरे शरीर में भी बिजली कड़क उठी.

इधर मैं आप सभी को उसके बारे में कुछ बता दूं ताकि आपको भी उस रेखा की जवानी का अंदाज हो जाए.

रेखा का रंग एकदम गोरा था और उम्र 23-24 साल की ही थी. उसकी तनी हुई चूचियां और टाइट गोल गोल गांड थी.

मैं उसका रूप देखकर गर्मा गया था और मेरा लौड़ा पूरा खड़ा हो गया था. वो अभी तक आंख बंद करके बैठी थी.

मैंने उससे कहा- रेखा जी, आप डरो नहीं, मैं हूँ ना!
वो बोली- मैं बिजली से बहुत डरती हूं.

उसी समय बारिश और तेज हो गई और जमकर बिजली कड़कने लगी.
इस बार उसने मुझे कसकर अपनी बांहों में भर लिया और मुझे लता सी लिपट गई.

मैंने उसे गोद में उठाया और बिस्तर पर लिटा दिया.
वो आंखें बंद करके लेटी थी.

मैं बिस्तर से उठने लगा, तो उसने धीरे से कहा- मुझे डर लग रहा है.
मैंने कहा- मैं कहीं नहीं जा रहा हूं … हवा तेज है, जरा दरवाजा बंद करने जा रहा हूँ.

मैंने दरवाजा बंद ही किया था कि तभी अचानक से लाइट चली गई.
मैं जैसे ही बिस्तर पर आया, तो वो मुझसे लिपट गई.

मैंने धीरे धीरे उसकी पीठ पर हाथ फेरना शुरू कर दिया और उससे कहा- डरो मत, मैं हूं ना!

उसके जिस्म की गर्मी से अब धीरे धीरे मेरे लौड़े मैं करंट दौड़ने लगा था.

मैंने धीरे से उसकी गांड में हाथ फेरना शुरू कर दिया, उसने कोई विरोध नहीं किया … शायद उसे भी चुदास चढ़ने लगी थी.

कुछ देर बाद मैंने उसे बिस्तर पर चित लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ कर उसके रसीले होंठों को चूसने लगा.
वो मुझे हटाने लगी और बोली- मैं शादीशुदा हूं, ये गलत है. छोड़ो मुझे.

मैं डर गया क्योंकि मैं इस समय गांव में था और जरा में बदनामी हो सकती थी.

तभी फिर से जोर से बिजली कड़की, तो उसने मुझे फिर से अपनी बांहों में खींच लिया.
उसी पल मैंने उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया.

जब तक बिजली कड़कना बंद हुई, तब तक तो उसके शरीर में बिजली दौड़ने लगी और वो भी गर्म हो गई.
अब वो भी मेरे होंठों को चूसने लगी.

मैंने बिना देर किए उसकी साड़ी ब्लाउज और पेटीकोट को उतार कर अलग कर दिया.

मैं उसकी चूचियों को मसलने लगा और पैंटी पर हाथ डालकर उसकी चूत को ऊपर से सहलाने लगा.
वो एकदम से गर्मा गई थी.

मैंने जल्दी से उसकी ब्रा पैंटी भी उतार दी और अब वो पूरी नंगी हो चुकी थी.

उसने भी मुझे नंगा कर दिया और मेरे ऊपर आकर मुझे चूमने लगी.

मैं भी उसकी चूचियों को मसलने लगा और उसकी गांड में हाथ फेरने लगा.

फिर मैंने उसे बिस्तर पर अपने नीचे किया और उसके मुँह में लंड डालकर उसका मुँह चोदने लगा.
वो भी लंड को गपागप गपागप अन्दर बाहर करने लगी.

उसने मुझे चित लिटा दिया और मेरे मुँह में अपनी चूत रख दी. मैं जीभ घुसा कर चूत को चाटने लगा उसकी चूचियां मेरे हाथों में लेकर दबाने लगा.

कुछ ही देर में मैंने उसकी चूत को गीला कर दिया और उसे लंड पर झुका दिया.
वो फिर से लॉलीपॉप के जैसे गपागप गपागप लंड चूसने लगी.

मैंने देर न करते हुए उसे उठाकर लंड पर बैठा दिया. वो अपनी चुत में लंड का सुपारा सैट करने लगी.

फिर उसने जैसे ही चूत का दबाव बनाया लंड चुत के अन्दर घुसता चला गया.

‘ऊईईई मम्मी रे … मर गई … ऊई बहुत लम्बा है … आह उईई ..’ करके चिल्लाने लगी.
तेज बारिश में उसकी आवाज दब गई और मेरा लौड़ा सटासट सटासट अन्दर बाहर होने लगा.

मैंने उसकी कमर पकड़कर नीचे से झटके मारना शुरू कर दिया. अब वो भी धीरे धीरे लंड पर उछल उछल कर गांड पटकने लगी.

कुछ ही देर में मस्ती का आलम छा गया और वो खुद से अपनी चूत से लंड को चोदने लगी.

मैंने उससे पूछा- तुमने अपने पति के अलावा और किसी से भी चुदवाया है?
उसने कहा- हां शादी से पहले मेरा एक दोस्त था. उसने मुझे कई बार चोदा लेकिन शादी के बाद अपने पति से ही चुदवाती हूँ. आज न जाने कैसे तुम्हारे साथ चुदने लगी हूँ.

अब मैंने उसे बिस्तर पर नीचे लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गया.
अपना लंड चुत में घुसा दिया और उसे धकापेल चोदने लगा.

वो अपनी दोनों टांगें हवा में उठाते हुए बोली- आहह आहह और तेज़ और तेज़ … मज़ा आ रहा है.

मैंने अपने लौड़े की रफ्तार और बढ़ा दी और तेज़ी से अन्दर-बाहर करने लगा.
‘आहह उम्महह आउहहहहह …’ करके वो मस्त होकर लंड ले रही थी.

मैंने पूछा- मजा आ रहा है मेरे साथ?
उसने बताया- हां बहुत मजा आ रहा है … मेरा पति भी मुझे खूब मस्ती से चोदता है. मगर तुम्हारा काफी अन्दर तक जा रहा है.

उसकी बात से मैं और जोश में आ गया और लंड को बाहर निकाल लिया.

फिर से एक जोर का धक्का लगाया, तो वो दोहरी हो गई और चिल्लाने लगी- ऊईई ईईई ऊईईई मर गई!

उसकी चीख निकलनी अब तेज़ हो गई थीं. मैंने भी फुल स्पीड में लंड को गपागप गपागप पेलना शुरू कर दिया.

मैंने कहा- ऐसे चोदता है तेरा ठोकू!
वो बोली- नहीं … वो प्यार से चोदता है.
मैंने कहा- कैसे!
वो बोली- घोड़ी बना कर.

मैंने तुरंत उसको उठाकर घोड़ी बना दिया और उसकी गांड पर चांटें मारने लगा.
वो बोली- अब घुसाओ न!
मैंने कहा- रूको तो रानी. पहले थोड़ा सा लंड चूस दो.

वो गपागप गपागप चूसने लगी और लंड को मस्त गीला कर दिया.

मैं पीछे से उसकी चुत में लंड घुसाने के लिए लंड सैट करने लगा. उसकी कमर पकड़कर जोर से लंड चुत में घुसा दिया और चोदने लगा.

“ऊईईईईई मर गई बचाओ मर गई बचाओ ..” वो चिल्लाने लगी.
मगर मैंने उसकी एक न सुनी और लंड को तेज़ तेज़ पेलने लगा.

कुछ देर में उसकी चीखें कम होने लगीं और वो गांड आगे पीछे करने लगी.
मैंने भी अपने लौड़े को और तेज़ तेज़ पेलना शुरू कर दिया.

“आहहह चोदो मुझे आहहह आह हहहह और चोदो मुझे और चोदो आह पूरा घुसा दो.”

मैं उसके ऊपर चढ़ गया और लंड को अन्दर तक पेलने लगा.
तभी उसकी चूत कसने लगी और उसने पानी छोड़ दिया.

चुत के रस छूटने से अब मेरा लंड फच्च फच्च करके अन्दर तक आराम से जाने लगा.

वो भी शांत होकर लंड लेने लगी थी.

मैंने उससे कहा- तुम्हारी चूत बड़ी मस्त है.
वो बोली- हां, मैं अपने पति बस का लंड लेती हूं. इसीलिए ढीली नहीं हुई है.

मैंने कहा- आज तो मेरा भी ले रही हो. शायद अब ढीली हो जाए.
वो हंस कर बोली- शायद मेरी किस्मत में तुम्हारा लंड लेना लिखा था.

कुछ देर बाद मैंने उसे वैसे ही चित लिटा दिया और उसकी टांगें फैला कर चोदने लगा.

वो मस्ती से कमर उठाते हुए आवाज करने लगी.
उसकी गीली चूत में लंड अन्दर तक जल्दी जल्दी जाने लगा था. वो पूरी मस्ती से गांड उठाते लंड ले रही थी.

मेरे लौड़े ने कुछ देर बाद अपनी रफ़्तार शताब्दी एक्सप्रेस के जैसी बढ़ा दी और झटकों के साथ वीर्य की धार छोड़ दी.
उसकी चूत वीर्य से भर गई और मैं उसके ऊपर लेट गया.

अब तक धीरे धीरे बारिश भी कम होने लगी थी और अंधेरा भी हट गया था.

थोड़ी देर बाद वो उठी और बोली- लगता है बारिश रूक गई.

तभी फिर से बारिश शुरू हो गई. मैंने उसे फिर से बिस्तर पर खींच लिया.

वो बोली- कितना टाइम हो गया है!
उस समय 3 बजे थे.

वो बोली- मुझे 5 बजे तक घर पहुंचना होता है.
मैंने कहा- अभी तो टाइम है.

मैंने उसके होंठों को चूसने लगा, वो भी साथ देने लगी.

मैंने उसे उठाकर बिस्तर पर लिटा दिया और हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गए.
वो मेरे लौड़े को बहुत मस्त होकर चूस रही थी. मैंने अपनी जीभ को उसकी चूत में घुसा दिया और अन्दर बाहर करने लगा.

वो लॉलीपॉप की तरह मेरा लौड़ा अन्दर तक ले रही थी. अब हम दोनों फिर से गर्म हो गए थे. मैंने उसे उठाकर घोड़ी बना दिया और उसकी चूत में लंड घुसा कर गपागप गपागप चोदने लगा.

‘आहहह उम्माहहह आहहह ..’ करके वो गांड मटका मटका कर लंड लेने लगी.

मैं समझ गया कि इसका पति भी मेरे जैसा खिलाड़ी है और इसे जमकर चोदता है.

कुछ देर बाद मैं घोड़ी पर सवार हो गया और चूत लंड का घमासान युद्ध शुरू हो गया.

कभी उसकी चूत लंड पर हावी हो जाती, तो कभी लंड चूत पर हावी हो जाता.
दोनों चुदाई में बराबर से दम लगा रहे थे.
वो भी अपनी चूत को जमकर चला रही थी.
बाहर बारिश भी बहुत तेज शोर मचाने लगी थी.

फिर मैंने अपना लौड़ा चुत से निकाल लिया और अलमारी से तेल की कटोरी उठा ली.
मैंने उसकी गांड में तेल की धार गिरा दी और उंगली से छेद खोलने लगा.

वो बोली- उंगली नहीं, तुम सीधे लंड डालो.

मैंने अपने लौड़े पर तेल लगाया और उसकी गांड में लंड घुसा दिया.

“उईईई ईई उईई ईईई मर गई … निकाल अपना लंड … आह कुत्ते निकाल ले मादरचोद … आह बचाओ बचाओ मर गई निकाल कमीने.”

मगर उसकी सुनने वाला कोई नहीं था और बारिश में उसकी आवाज बाहर नहीं जा रही थी.

मैंने और तेज़ तेज़ लंड अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया.

“ऊईई ऊईईई ईईई मर गई बचाओ बचाओ मर गई ..” वो लगातार चीख रही थी.
फिर उसकी आवाज लड़खड़ाने लगी. वो मेरे लौड़े के वार को झेल नहीं पा रही थी.

मैंने उसकी चूचियों को पकड़ लिया और दबाते हुए उसे चोदने लगा. मैंने लंड को ढीला छोड़ दिया.

उसका दर्द कुछ कम हुआ, तो वो अपनी गांड चलाने लगी.
मैंने अपने लौड़े की रफ्तार तेज कर दी और गपागप गपागप अन्दर बाहर पेलने लगा.

कुछ देर बाद वो बोली- मुझे सीधा लेटने दो.

मैंने उसको बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी टांगें उसके सर से लगा आकर उसकी गांड में लंड घुसा दिया.
इस बार उसने बड़े आराम से लंड गांड में ले लिया था.
मैं मस्ती से उसकी गांड मारने लगा.

इस पोजीशन में लंड गांड के अन्दर तक जाने लगा था. जिससे उसको ज्यादा दर्द हो रहा था.
मैंने नीचे तकिया लगा दिया और गांड में पूरा लंड डालकर चोदने लगा.

तकिया लग जाने उसका दर्द कम होने लगा और उसकी गांड में लंड आसानी से अन्दर बाहर होने लगा.

इतनी देर बाद उसे कुछ याद आया. तो वो बोली- तेरा नाम क्या है?
मैंने कहा- राज़ … क्यों डायरी में लिखना है क्या?

वो बोली- नहीं … मगर राज तुम तो आज मेरी गांड फाड़ दोगे … ऐसा लगता है.
मैंने कहा- नहीं मैडम, मैं तो बस लड़कियों को चुदाई का मजा देता हूं.

वो बोली- मालूम है … मैंने एक महीने से गांड में नहीं लिया था.
मैंने कहा- अब तुम्हारी गांड में दर्द नहीं होगा.

वो बोली- हां. अब तो अपने के लंड से भी दर्द नहीं होगा. तेरा लम्बा और मोटा जो है.
मैंने कहा- अब तुम सीधी लेट जाओ, मैं चूत में डालूंगा.

वो बोली- राज, तुम जहां चाहो डालो … आज रेखा तेरी है.

मैंने उसकी चूत में थूक लगाया और लंड को अन्दर घुसा कर तेज़ तेज़ चोदने लगा.

‘आहह आअह ओहहह राज चोदो मुझे आहहह आहह ..’

मैंने अपना लंड पूरा बाहर निकाला और जोर से घुसा दिया.

‘ऊईईईईई ऊईईई ..’

फिर मैंने लंड को चौथे गियर में डाल दिया और गपागप गपागप चोदने लगा.

अब मेरा लौड़ा अन्दर बच्चादानी तक जाने लगा और उसकी आह आहह की आवाज तेज हो गई थी.

रेखा की चूत ने पानी छोड़ दिया और मेरे लौड़े को गीला कर दिया.
लंड फिसलता हुआ बच्चेदानी तक जाने लगा और फच्च फच्च फच्च की आवाज तेज होने लगी.

मेरा लौड़ा तो घोड़े जैसा रेखा की चूत में दौड़ने लगा था.
मैं रेखा की चूचियों को मसलने लगा और उसकी कामुक आवाजें फिर से तेज़ हो गईं.
उसने अपनी टांगें मेरी कमर पर लपेट दीं और लंड को अपनी चूत में कसने लगी.

मैंने अपने लौड़े को रफ्तार देकर चोदना शुरू कर दिया.
कुछ ही देर में रेखा ने फिर से पानी छोड़ दिया.
मेरा लंड तो रूकने का नाम ही ले रहा था.

कुछ देर बाद मेरे शरीर में अकड़न होने लगी और झटकों के साथ मेरे लौड़े ने वीर्य छोड़ दिया.
उसकी चूत भर गई.

हम दोनों चिपक कर लेट गए.

थोड़ी देर बाद रेखा ने कहा- राज अब नीचे उतरो.
मैंने लंड निकाल लिया और उठकर बाथरूम में चला गया.

जब तक मैं आया और रेखा ने कपड़े पहन लिए थे और वो फोन में बात कर रही थी.

उसने मुझे देखा और बताया कि मेरे पति मुझे लेने आ रहे हैं. वो 4:30 तक आ जाएंगे.

अभी हमारे पास 30 मिनट थे.

मैंने उससे कहा- एक राउंड और हो जाए.
वो बोली- नहीं, अब बारिश भी बंद हो गई है.

लेकिन मेरा लौड़ा मानने वाला नहीं था मैंने उसे उठाकर बिस्तर पर पटक दिया और उसके ऊपर आ गया; लंड को उसके मुँह में डाल कर चोदने लगा.
वो मुझे धक्का मारने लगी. मैंने उसके हाथ पकड़ लिए और तेज़ तेज़ चोदने लगा.

वो भी गर्म हो गई और लंड को चूसने लगी.
फिर वो बोली- राज तुम खड़े हो जाओ.

मैं खड़ा हुआ तो उसने घुटनों के बल बैठ कर लंड को लॉलीपॉप की तरह चूसना शुरू कर दिया.
तब मैं आंख बंद करके लंड चुसवाने का मजा लेने लगा.

वो लंड को आराम से चूस रही थी. कभी वो लंड के सुपारे को चूसने लगती तो कभी मेरे आंड चूसने लगती. इससे मेरा जोश बढ़ने लगा.

मैंने उसे उठाकर बिस्तर पर झुका दिया और उसकी साड़ी ऊपर कर दी उसकी पैन्टी को घुटनों तक करके उसकी गांड में लंड घुसा दिया और तेज़ तेज़ चोदने लगा.

वो चिल्लाने लगी, तो मैंने उसके मुँह में हाथ लगाया और तेज़ तेज़ झटके मारने लगा.

उसका दर्द कम हुआ तो वो बोली- राज साले जल्दी से चोद ले … मेरे पति आ गए तो गड़बड़ हो जाएगी.
मैंने कहा- हां, बस अबकी बार जल्दी काम कर दूँगा.

मैं उसे तेज़ तेज़ चोदने लगा. हम दोनों की सिसकारियां तेज़ हो गईं.

इस बार मेरा लौड़ा बिल्कुल भी रूकने वाला नहीं था. सटासट सटासट अन्दर तक जाने लगा.

तभी रेखा के पति का फोन आ गया.
मैं रुक गया.

वो बोला- मैं लेने आ रहा हूँ. तू किधर है?
उसने कहा- मंदिर के पास आ जाओ.

फोन काटकर वो बोली- राज अब लंड निकालो … मुझे जाना है.
मैं बोला- नहीं, अभी मेरा नहीं हुआ है.

मैं जोर जोर से धक्का मारने लगा.
मगर रेखा बोलने लगी- प्लीज छोड़ दे यार … निकाल ले लंड!

मैंने लंड निकाल लिया और उसे नीचे बैठाकर मुँह में घुसा दिया.
वो जल्दी जल्दी लंड चूसने लगी और लंबी लंबी सांसें लेने लगी.

मैंने तेजी से लंड को अन्दर बाहर करना चालू कर दिया और अब मेरे लौड़े से वीर्य निकलना शुरू हो गया.

रेखा वीर्य पी गई और लंड को साफ़ करने के बाद अपने कपड़े ठीक करके अपना दवा का डिब्बा लेकर मुझे प्यार से बाय बोल कर चली गई.

मैं नंगा ही चादर ओढ़कर सो गया.

जब चाची घर आई तो उसने मुझे जगाया.

उसने जैसे ही चादर हटाया, तो मेरा लौड़ा खड़ा हो गया.

वो लंड देख कर बोली- ये क्या है?
मैंने कहा- तुम्हारे लिए ही है.

मैंने चाची की गर्दन खींची और उसके मुँह में लंड लगा दिया.
चाची लंड चूसने लगी.

थोड़ी देर बाद उसने लंड निकाल दिया और बोली- कौन आई थी?
मैंने कहा- क्या मतलब?

वो बोली- मुझसे झूठ मत बोलो तुम्हारे लौड़े में चूत का पानी लगा है.
फिर मैंने उसे बताया कि पोलियो के लिए रेखा आई थी.
वो गुस्से में बोली- जाओ उसी रेखा के पास मां चुदाओ.

चाची अन्दर चली गई और भुनभुनाते हुए खाना बनाने के लिए किचन में चली गई.

मैंने अपने कपड़े पहने और बाहर घूमने चला गया.

उसके बाद दो दिन तक चाची मुझसे गुस्सा रही. बाद में उसने मेरे साथ जम कर चुदाई का मजा लिया.